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अंधेरे की डोर

sunanda saudamineesunanda saudaminee February 3, 2022
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रात का अंधियारा हर किसी को नहीं डराता है              

हर जलता चिराग सबकी राह कहां रोशन कर पाता है                    

डरना किससे है,डराना किसको है

कौन दिया मेरा है,किस चिराग तले अंधेरा है

यह तय किया सबने अपने तरीके से है

लाखों दामिनी राह में बिछी हो फिर भी

एक भी कदम ना रख पाये हम सही

हिम्मत की रोशनी हो तो हर कदम पड़ती सही

चाहे सामने हो गहरी अंधेरी गली

कहां बढ़ना है, कहां रूक जाना है

कहां तक जाना है, कहां से लौट आना है

यह सब तो हमारे अन्तरमन का खेल है

और इनमें हमारे अच्छे-बुरे विचारों का मेल है

जिस दिन समझ लिया ये सारा माज़रा

उसी दिन ढूंढ लिया अंधेरे में रास्ता

उस दिन से जिंदगी में होगी खुशहाली

नहीं डरा सकेगी कोई गली अंधियारी

जगमग राहों के पीछे भागने की सोच छोड़

पकड़ अंधेरों में राह खोजने की डोर

फिर तेरी जय जयकार होगी चहुं ओर

#सुनन्दा सौदामिनी

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