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हर चेहरे में नया चांद

Suhani raiSuhani rai June 22, 2022
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इश्क वो जो था दरिया सा अपना,

उस दरिया से निकल जाना जरूरी था क्या?

निकलना था तो हमको निकालते ;

सुकून से मुझे बिखरता हुआ देख पाते!


पता नही था मुझे,

कि अफसोस अब कोई फिर तुमको ना होगा;

कभी तुम खुद से कुछ गलत ना करते,

बोलता नही क्या कुछ दिल ये तुम्हारा;

बता देते गर तो हम शिकवा भी ना करते!


नासमझ भी इतनी ये मोहब्बत नही थी;

प्यार से तुम्हारे कभी कोई शिकायत ही नही थी!


कहो आज तुम भी कि थी गलती तुम्हारी,

अंधेरी रातों में खुशबू तुम्हारी चाहना;

चांद के उजालें में तुम्हारे लिए तरसना,

ये आंसू,हंसी,गुस्सा हमारा;

सब कुछ अपना था तुम्हारे नाम जो करना!


था गलत सब तो है सही क्या बताओ?

हर एक चेहरे में नया चांद ढूंढना,

सिमटी जो किरणे मुस्कुराहटों को भूलना;

किए थे जो वादे उन वादों को तोड़ना!

बताओ तुम ही थी क्या खता हमारी?

क्या इतना जरूरी था मुझे भूल जाना?

©️सुहानी राय

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