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ज़िन्दगी का स्पर्श

Sudhir BadolaSudhir Badola November 11, 2022
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     ज़िन्दगी का स्पर्श


ज़िन्दगी का स्पर्श पाकर

फिर आज मन संभल गया

टूटे हुए अधूरे सपनों को

जीने का औवित्य मिल गया


ऊष्मता थी इन हौसलों में

जो मौसम भी बदल गया

वृक्ष की टहनी से छूटा

मुरझाया फूल भी खिल गया


इन भुजाओं के देख इरादे

पर्वत स्वयं भी हिल गया

खींचा उम्मीदों की डोर ने जब

पतंग को आसमाँ मिल गया



ज़िन्दगी का स्पर्श पाकर

फिर आज मन संभल गया

 

     - सुधीर बडोला

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