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सशक्त दरख़्त

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पत्ती चटक सी हरी है

वो टहनी से जो जुड़ी है

टहनी में कोमलता है

क्यूँकि वो शाखा से संलग्न है

शाखा उन्माद में लहराती है

मगन है आसक्त तने से होने पर

निष्ठुर तना सशक्त खड़ा है

ग़ुरूर उसे जड़ों से जो जुड़ा है

जड़े निश्चिंत सी बिछीं है

धरा की गोद में जल से सिंची हैं

सूर्य की ऊर्जावान किरणों का सानिध्य

परिवार रूपी वृक्ष को संपूर्ण करता है

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-सुधीर बडोला

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