मैं दीपक की लौ जलाऊँ's image
Share0 Bookmarks 327 Reads2 Likes

मैं दीपक की लौ जलाऊँ


तुम माटी के दिये बनाओ

मैं दीपक की लौ जलाऊँ

अनुशय सारे अब बिसरा कर

टूटे रिश्तों को फिर अपनाऊँ ।


घर आँगन को कर रोशन

पटाखों का तुम्हें शोर सुनाऊँ

बाँट खील बताशे और मिष्ठान

मधुर पलों को गले लगाऊँ ।


राह दिखे जो मुरझाए चेहरे

उन कुंठित आँखों को चमकाऊँ

जिन घरों में छाया हो अंधेरा

उनको उज्ज्वल रोशन कर जाऊँ ।


अब मतभेदों का हटा आवरण

मै प्रेम का नव परिधान पहनाऊँ

छोड़ जीर्ण इन प्रथाओं को पीछे

मैं नित्य नई चेतना जगाऊँ ।


खुशियों की अगर-धूप से

हर आँगन को महकाऊँ

तुम माटी के दिये बनाओ

मैं दीपक की लौ जलाऊँ ॥


-सुधीर बडोला

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts