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मेरी दीपावलीPoetry1 min read

एक दीप ऐसा तुम जलाओ....

Sudhir BadolaSudhir Badola November 7, 2022
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एक दीप तुम ऐसा जलाओ…


ज्ञान से जो हो आलोकित

वैचारिक आधुनिकता अपनाये

अभिव्यक्ति से हो स्वतंत्र

एक दीप ऐसा तुम जलाओ ।


संयम का नव परिधान ओढ़े

धरे हस्त श्रम के दस्ताने

हो संघर्ष से ज्वलंत जो

एक दीप ऐसा तुम जलाओ ।


कन्या जन्म पर उत्सव मनायें

स्त्री में लक्ष्मी साक्षात नजर आए

हर मन में शिक्षा का भाव जगे

एक ऐसा दीप तुम जलाओ ।


हर रोग का यहाँ उपचार हो

ना भूख से कोई लाचार हो

अब शहर गाँव का रुख़ करे

एक ऐसा दीप तुम जलाओ ।


हर हिंदुस्तानी साथ संग चले

मतभेदों पर मीठी चासनी घुले

पटाखों के धुएँ में हों नफ़रतें विलुप्त

एक दीप ऐसा तुम जलाओ ।


-सुधीर बडोला

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