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Romantic PoetryPoetry1 min read

बस तुम साथ देना…

Sudhir BadolaSudhir Badola November 24, 2022
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बस तुम साथ देना…


ग़म के अंधेरे हों

बेचैनी ने घेरे हों

जब ख़ुशियों पर पहरे हों

बस तुम साथ देना…


विकट परिस्थिति आए

जब कदम डगमगाये

कोई हल समझ ना आए

बस तुम साथ देना…


भोर या हो साँझ की बेला

तन्हाई या हो मेला

जब भी हो मन अकेला

बस तुम साथ देना...


पारिवारिक उलझन हो

रिश्तों में अन -बन हो

मतभेदों की दल-दल हो

बस तुम साथ देना…


मायूसियत का चेहरा हो

सवालों ने घेरा हो

असमंजस का डेरा हो

बस तुम साथ देना…


-सुधीर बडोला

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