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तुम छोड़ गए।

Sudha KushwahaSudha Kushwaha March 19, 2022
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क्यों तुम मुझको छोड़ गए।

मुझ से मुंह मोड़ गए।

कैसे अनोखे रिश्ते बनाए तुमने।

जो पल भर में तोड़ गए।

ऊंची ऊंची बिल्डिंग गो की छतो के।

नीचे धरती पत्तियों के।

तपते इन् रेतो के।

सहारे छोड़ गए।

इस दुनिया की भीड़ में।।

इन लोगों की छोड़ में।

इस कठिन मोड में।

इस रफ्तार में क्यों छोड़ गए।

तुम इतने क्यों बुरे थे।

तुम मेरे लिए सारी दुनिया से क्यों लड़े थे।

तुम मेरे लिए क्यों पागल बने थे।

तुम रिश्तो की अहमियत पहले समझ गए थे।

क्यों तुम मुझको छोड़ गए हो।

क्यों तुम पब्लिक प्लेस पर छोड़ गए थे।

तुम ऐसे क्या रूठे हमसे हमेशा के लिए रूठ गए थे।

श्मशान घाट की भीड़ में तुम ठहर गए थे ।।

प्यासे इस दिल को बिना कुछ कहे तो चले गए थे।

रूठो भी तो तुमसे कैसे तुम बनाने के लिए नहीं रह गए थे।

क्यों तुम मुझे अकेला छोड़ गए थे।

तपती धूप में मुंह मोड़ गए थे।

क्यों हो तुम हमसे रूठ गए थे।

क्यों तुम मुझे छोड़ गए थे।



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