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मुस्कुराहट मेरी।

Sudha KushwahaSudha Kushwaha June 10, 2022
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मुस्कुराने की वजह मैं खुद हूं।

हर एहसास की खुशी मैं हूं ।

बूंदों का गिरता वह सागर में हूं ।

गंगा से पावन मैं हू।

गंगा का मनभावन मैं हूं।

बस मैं ही मैं हूं।

खुशियों की चादर मैं हूं।

अंबर का गागर मैं हूं।

चमकती चांदनी को सहारा मैं हूं।

दो वक्त की खुशी का गुजारा मैं हूं

मुस्कुराने की वजह मैं खुद हूं।

मेरे अस्तित्व के अंदर समाया शिव का बड़ा सा ब्रह्मांड मैं हूं।

मैं ख्वाहिश की एक बूंद मैं मैं हूं।

अमृत का ओह पान में हूं।

छोटी सी शमशान मैं हूं।

घमासान मैं हूं।

विकराल मैं हूं।

जनाब इश्क की एक एक बूंद में बस मैं ही मैं हूं।

खुशियों का संसार में मैं हूं।

तुम्हारे अरमानों के दीपक का उजाला में हूं।

एक बूंद इश्क का सहारा मैं हूं।



अमृत की एक बूंद_ सुधा

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