मौत।'s image
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किसी दिन किसी गली।

मे किसी रोज मौत अगर मुझ से टकराई।

तो मैं उससे कहूंगी।

अभी ठहर जा।

मुझे अपनी डायरी में दो लफ्ज़ लिखने हैं।

अभी जिंदगी जी ही क्या है मैंने।

अभी जिंदगी में कितने कर्ज भरने हैं।

डायरी को करवट ओके तले दबकर।

उधार के सपने बुनने हैं।

किसी दिन किसी गली मैं किसी रोज।

अगर तू मुझसे टकराए ना।

तो वादा।

मैं तेरी पलकों से अपनी पलकें मिलाऊंगी।।

अपने अंदर के उस डर को भगा आऊंगी।

24 घंटो का मोहलत मांगूंगी तुझसे।

अपने हर ख्वाहिशों को दहलीज पर लाऊंगी।

जब तू आएगी मैं तब भी मुस्कुरा आऊंगी।

मैं उस तरफ से एक ही दुआ करूंगी।

मैं अपनी डायरी की सलामत के लिए फरियाद किया करूंगी।

घड़ी दो घड़ी मैं उसे याद किया करूंगी।

जिस दिन जिस गली में मौत अगर मुझ से टकरा एगी।

आंखें झुका कर शर्मआएगी।

वह मेरे होने पर इतरा आएगी।

जब अगले की मौत आएगी।

वह मेरी बहादुरी का किस्सा सुनाएगी।

मुझे शायरों का शायर बताएगी।

मेरी डायरी को पढ़कर सुनाएगी।

मेरे लिए वह वफादार हो जाएगी।

मौत भी मुस्कुराए गी।


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