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मना लो हमको।

Sudha KushwahaSudha Kushwaha March 8, 2022
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तुम घड़ी दो घड़ी बुलाते नहीं।

तुम हम को मनाते नहीं।

इस पागल दिल को तुम समझाते नहीं।

ना जिक्र कर पुरानी बातों का।

इस दिल को तुम बहलाते नहीं।

तुम खामोश इस तरह हमसे ।

खामोश हो जाते हो।

24 घंटों में कई बार।

बार-बार तड़पता है यह दिल।

तुम इसको तनिक सा भी समझाते नहीं।

मेरी बेचैनी देखकर।

तुम घबराते नहीं।

रात भर सो न पाई आंखें।

तुम्हारे ख्यालों में।

पर कुछ वर्षों बाद लगा।

कुछ तो कमी रह गई थी हमारे अफसाने में।

जो इश्क पुरा ना कर पाया।

दिल अंदर से टूटा था।

उसकी आवाज मुझे खुद ना आई।

लगा हट जाओ पीछे।

पर यह बात मेरे दिल को ना भाई।

हम तो वहीं खड़े रह गए।

एक एक पल गिनते हुए।

पर इस दिल के दर्द को देखकर।

तकदीर भी मेरे नाम से ना रो पाई।

कहा उसने खुदा से।

दे दो ना उसे।

इश्क है हरजाई।

लड़ गई मेरे लिए।

मेरी ही कलाई।

मोहब्बतें ने जाने कितने घरों में आग लगाई।

जाने कितने दिल टूटे।

जाने कितनी हुई अगुवाई।

कोई ना मिले तुमको अगर।

तुम ले लेना हम से गवाही।

इश्क वो मौत है।

जिसके आगे हर वफ़ा मरती आई।

हर उम्मीद रह गई कहीं।

मुरझाई मुरझाई।

वह भी सवर्ती है इश्क में।

जिसे सारी दुनिया कहे कसाई।

इश्क बन बैठा है बस एक दवाई।

यह अगर कड़वी लग गई।

बनी नहीं ऐसी कोई मिठाई ।

जो दर्द को मार दे।

क्या कोई कर पाएगी खतम जुदाई।






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