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केमिस्ट्री उड़ गई रातो रात।

Sudha KushwahaSudha Kushwaha October 6, 2021
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जब तेरी नैनों से।

मेरी नैन टकराई।

गजब का शोर हुआ।

केमिस्ट्री उड़ गई रातों-रात।

मेरी जिंदगी में गजब का झोल हुआ।

क्या बताऊं वो किस्सा।

जब मैंने जूलॉजी को खोला।

उसकी पलकों ने इशारों से कुछ बोला।

रातों की नींद हुई हराम।

बस बाकी रह गया यही अंजाम।

जिंदगी में शोर-शराबा क्या कम था।

जो तेरी नैना मेरी नैनों से इस तरह टकराई।

रातों की नींद चुरा कर।

चैन को सुला कर।

तेरी पलके फिर मेरे पास तक लौट आई।

तेरे नैनों ने चौपट कर दिया पूरा साल।

जब तेरी नैना से मेरी नैनों ने की खामोशी से बात।

बौखला उठा था उस पल मन मेरा।

जो पहले बीत गया साल।

तेरे नैना से मेरी नैन टकराई।

गजब का शोर हुआ उस रात।

बॉटनी ने की थी इशारों से बात।

कहां क्या होगा तेरा।

तू नैनो से नैनो के टकराने का अंजाम देख लेना।

कहीं का ना रह जाओगे।

रट लो सारी बॉटनी रातों-रत।

उस समय सुनी ना कोई बात।

आज कहीं के ना रह गए।

जानते हैं हम यह बात।


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