जिंदगी।'s image
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जिंदगी जर्जर पन्ने सी हो गई।

रूह में सुकून खो गई।

गिरे तो हम बहुत जोर से थे।

कब्रिस्तान की दीवारें हिल गई।

संभाला किसी ने नहीं।

मौत हमें मारने आई थी खुद मर गई।

मैंने दिल के अंदर एक आस जगी थी।

धीरे-धीरे करके मर गई।

एक दिया जलाया था विश्वास का।

मोहब्बत के नाम पर दुनिया उसे भी लूट ले गई।

जिंदगी जर्जर पन्नू सी हो गई।

मुस्कान कहीं खो सी गई।

अपने और पराए की जंग में मैं अजनबी होते चली गई।

मुश्किलों से हारी नहीं मैं ।

बस टूट कर बिखर गई।

हौसला देने वाला कोई एक नहीं मिला।

यह कहती मेरी जर्जर पानो सी जिंदगी रूठ गई ।

सब ने कर लिया अपनी मनमानी।

मैं मासूम सी लड़की ।

ये खुदा उस वक्त से रूठ गई।

कोई क्या मुझे हौसला देता।

मैं उस बुरे वक्त से आगे निकल गई।

जिंदगी जर्जर पन्नों सी हो गई।

खुदा क्या रूठना हमसे।

मुश्किल वक्त में।

किसी को यह दिल अपना मान ले।

यही सोच कर ही तो।

ख्वाइशें ही मर गई।

अब किसी से आस ही नहीं रह गई।

अब वो जिंदगी कहां रह गई।

अपना कहने के लिए यह पूरी ख्वाहिसे ही बिखर गई।

मौत आई नहीं फिर भी।

यह जिंदगी बहुत बुरी तरह मर गई।

शुक्रिया उस बुरे वक्त का।

जिंदगी लड़ना सिखा गई।

उन्हें बुरे वक्त में जो मुस्कुराए।

बस वही एक आखिरी जिंदगी कहलाए।




अमृत की एक बूंद~sudha











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