जिंदगी।'s image
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जिंदगी ने खूब रुलाया है।

जिंदगी बेईमान लगने लगी।

आपने उसके किरदार लगने लगे।

मौत आती नहीं फिर भी हम मरने लगे।

चिता की राख से हम आब सवारने लगे।

देखो ना साहब।

पैसों से बिकने वाली इस दुनिया में ।

हम ईमान जैसी थर्ड क्लास बातें करने लगे।

मौत आती नहीं फिर भी हम मरने लगे।

कौन सवारे गा हमे।

किसी की औकात नहीं हम यह घूम घूम कर कहने लगे।

बिछा के गमों की चादर हम सोने लगे।

हम अपनी ही फूटी किस्मत के भरोसे जीने लगे।

हम बोलते भी क्या हम अपनी ही जुदाई पर रोने लगे।

दिल को गिरवी रख कर हम।

मोहब्बत का सौदा करने चले थे।

मौत आती नहीं है।

फिर भी हम खुद को खोने लगे हैं।

मेला बहुत है यहां अपने और पराए ए का।

हम पागल इस मेले में अपना ढूंढ रहे हैं।

खिलौनों से कम लोग अब जज्बातों से ज्यादा खेल रहे हैं ।

बदलते इस दौर में लोग प्रैक्टिकल हो रहे थे।



अमृत की एक बूंद~sudha






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