हुस्न।'s image
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हुस्न का दीदार करना हो अगर कभी।

हमारी गलियों में आ जाना।

जब तड़पता हो दिल तुम्हारा।

फिजूल का उसको मत समझाना।

मेरे घर की एक-एक ईद पर तुम मोहब्बतें दास्तान उकेरवाना।

जब गुजरे कोई आशिक यहां से।

तुम एक किस्सा उसे सुनाना।।

जब थक जाए मेरी आंखें तुम्हारे इंतजार में।

तुम झूठा ही सही अपने बिल्डिंग की छत पर खड़े होकर चिल्लाना।

मैं हूं अभी।

यही ख्वाहिशों का एक पन्ना दोहराना।

हुस्न का दीदार करना हो कभी अगर।

हमारी गलियों से गुजर जाना।

मेरे घर की एक-एक सीट पर तपते अंगार जो बरसते हैं।

तुम भी उसका किरदार बन जाना।

जमाना गुजर जाएगा।

गुजारा होगा हमारा यही।

मोहब्बत की हर दास्तां झूठी निकलेगी।

हर वफादार पहले अपनी वफा सोचेगा।

मुल्क बिक जाएगा।

हमारी जैसी मोहब्बत गली के किसी कोने में नहीं मिलेगी।

लाखों बस्तियां जल जाएंगी।

पर एक शिव भक्त देखना जिंदा रहेगा।

मुस्कान उसकी ऐसी कि उस पर खुदा मरेगा।

हुस्न का दीदार करना हो अगर कभी।

तो मेरी गलियों से गुजर जाना।

मेरे हाथों की मेहंदी का ।

जो दीदार हो तुम्हें।

उस दीदार का किस्सा सुनाना

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