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हर कोई समझाता है।

Sudha KushwahaSudha Kushwaha March 9, 2022
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हर कोई मुझे समझता है।

कभी मुझे भी समझ लो।

मेरा दिल भी यही चाहता है।

कोई तो घड़ी दो घड़ी।

मेरे दर्द को मेरी आंखों से पढ़ लो।

अरे कितना समझाओ गे।

कभी तो मुझे समझ लो।

अंदर से हर घड़ी मर रही हो।

कम से कम उसे महसूस कर लो।

टूट कर बिखर रही हूं मैं।।

कम से कम तुम देख लो।

आंखों से न दीखता हो तुम्हें।

तो मेरी सांसो को पढ़ लो।

तुम बेवजह ही सही।

एक बार।

सिर्फ एक बार।

मुझे समझ लो ।

हर कोई मुझे समझाने को तुला है।

तुम ना समझो ना सही।

तुम कम से कम।

मेरी बातों को सुन लो।

कम से कम घड़ी दो घड़ी समझ लो।



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