हमदर्द।'s image
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हम जिसे हम दर्द समझते हैं।

वही दर्द बन बैठते हैं ।

जिससे हम वफा की उम्मीद करते हैं।

जनाब वही बेवफा निकलते हैं।

हम जिस पर मरते हैं।

वही मार निकलते हैं ।

जिसे हम अपना मान बैठते हैं।

वहीं पराया निकल जाता है।

हमने अपना मानना ही छोड़ दिया।

हमने मनाना भी छोड़ दिया।

उनको रूठने में बहुत मजा आता है।

हमने मनाना है छोड़ दिया।

वह बहुत छुपाते हैं खुद को।

हमने उन्हें ढूंढना छोड़ दिया।

मुश्किलात तो बहुत है।

पर हकीकत तो यहीं है।

हमने लड़ना सीख लिया।

हमारे रूठने से आपको फर्क नहीं पड़ता।

हमने मनाना छोड़ दिया।

आपने नजरे चुराना शुरू कर दी।

हमने आपसे नजरें मिलाना छोड़ दिया।

बस हमने छोड़ दिया तो छोड़ दिया।

अब रूट बहुत जल्दी जाते हैं

हमने मनाना छोड़ दिया।

हमने मुस्कुराना भी छोड़ दिया।

दूसरों के खातिर ।

हमने सब कुछ छोड़ दिया ।




अमृत की एक बूंद~sudha


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