गुरुर जनाब।'s image
Poetry2 min read

गुरुर जनाब।

Sudha KushwahaSudha Kushwaha March 11, 2022
Share0 Bookmarks 122 Reads2 Likes

जाने कितनी रातें तुमने तस्वीरें देखकर बिताया है।

दिल में आग होते हुए भी तुमने बुझाया है।

हर रात मैसेज टाइप करके तुमने मिटाया है।

तुमने अपने अंदर के हर तूफान को दबाया है।

अपने हर जज़्बात को छुपाया है।

तुम जान न पाया कोई ऐसा वह बन पाया है।

तुम्हारे दर्द को कोई पढ़ पाए उन सारी हदों को पार करके तुम्हारा दिल आगे आया है।

दिमाग असंख्यओ बार पछताया है।

जो थे नहीं वही बनते आए हो।

कमियां है तुम मे मुझसे छुपाते आए हो।

दिल दर्द में मरता है तुम्हारा।

फिर भी तुम मुस्कुराते आए हो।

किसी को समझाया नहीं तुमने।

बस खुद को समझाते आए हो।

किताबों के कितने पन्नों पर अपना नाम समझकर मेरा नाम लिखते आए हो।

जिस तरह तुम बनते हो।

उस किस्से को तुम राज रखते आए हो।

यकीन मानो तुम पछताते आए हो।

हर ख्वाब से लड़ते आए हो।

हर पल हर घड़ी तुम मुझे खोने से डरते आए हो।

पहले जरूर कुछ रहा होगा।

नहीं मालूम मुझे।

तभी तो तुम गुरुर में आकड़ते आए हो।

बड़ा गुरूर तुम्हें अपनी हैसियत पर।

मेरे दर पर आकर तुम माथा टेकते आए हो।

मैं वह पवित्र स्थल तुम्हारा।

जहां आते ही तुम मुस्कुराते आए हो।

बेपनाह मोहब्बत को छुपाते आए हो।

तुम इसी सच से भागते आए हो।

तुम्हें खुद मालूम नहीं।

तुम कितना पागल हो।





No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts