गरीब।'s image
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गरीबी की मार ने बूढ़ा कर दिया साहेब।

नहीं तो हम भी कभी अपने गांव के अमीर थे।

बीवी की चीजों का ख्याल।

बच्चों की ख्वाइसो ने अंधा कर दिया।

गली गली की ठोकर खाकर।

अमीरों की गालियों ने।

कठोर कर दिया।

गरीबी के मार ने झकझोर कर रख दिया।

चेहरे की सुंदरता नहीं देख सकते साहेब।

हमें तो धूप में ही खटना पड़ता है।

दो वक्त की रोटी के लिए पसीनो से लड़ना पड़ता है।

अपने घर की इज्जत बचाने के लिए हमें सुबह शाम मेहनत करना पड़ता है।

बच्चे हमारे हैं।

यह किस किस से बताओ।

इसलिए चुप चाप ही मेहनत करना पड़ता है।

जिंदगी कुसूर बार नहीं।

मैं कैसे उसको कह दो।

दो वक्त की रोटी देती है।

मैं इतने में ही खुश हूं।



अमृत की एक बूंद _सुधा

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