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दिल का कोई समझता नहीं।

Sudha KushwahaSudha Kushwaha July 15, 2022
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दिल का दर्द हमारे कोई समझता नहीं।।

हर कोई आगे की दुआ दे रहा है।

शब्दों के जहर से कुछ भी घोल रहा है।

जुबान से निकले शब्द हमेशा लगते हैं।

बुरा हो तो ईश्वर भी कान लगाकर सुनते हैं।

हम भूल जाते हैं

वह बुरे वक्त सब कुछ याद दिलाते है।

अच्छे वक्त में ही तो शब्द ताकत बनकर लौट आते हैं।

दिल का दर्द कोई समझता नहीं।

बस कुछ भी कह देते हैं शब्दों से।

यह जिस्म कोई पुतला नहीं है।

यह समझता है फिर भी पलट कर जवाब देता नहीं।

यह किसी के लिए बुरा कहता नहीं।

किसी का बुरा करता नहीं।

अपने लिए कुछ मागता नहीं।

किसी से ख्वाहिशों की उम्मीद रखता नहीं।

मोहब्बत होने के बावजूद किसी से कहता नहीं।

इतना परेशान है दिल किसी से कहता नहीं।

पता है उसके परेशान करने पर।

पर यह बात यह दिल उससे भी कहता नहीं।

समझदार बहुत है अब कुछ समझता नहीं।

पागल नहीं है यह।

यह बात भी किसी से कहता नहीं।

ना करो हमारे भविष्य की चिंता।

हमें तो लगा है ये जिस्म मरता क्यों नहीं।

कितना और कितना जिएंगे हम।

अब यह जिस्म में मरता क्यों नहीं ।

जिससे हमें मोहब्बत की थी।

वह भी भाग निकला।

इतने बुरे लगे हम उसे हमें भी सड़क पर छोड़ निकाला।

जिसके साथ आज की जीने के सपने देखते थे।

वह समझ नहीं सका।

हमारी बेपनाह मोहब्बत को ओ पनाह ना दे सका।

मोत आई नहीं फिर भी दिल दुआओं में मांगा बैठे।

इश्क की गली है आज उसकी आस लिए ए दिल बैठे।

कास कोई उसको बता पाता।

मोहब्बत काबिलियत से नहीं होती।





अमृत की एक बूंद~sudha



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