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20 बरस पहले का प्यार।

Sudha KushwahaSudha Kushwaha February 11, 2022
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तेरी पहचान से डरती हूं मैं।

तेरा नाम सुनते ही रो पड़ती हो मैं।

जब तू मेरे पास आता है।

मेरा दिल फिर से जवा हो जाता है।

तेरा एहसास ही पुराने घावों को खुराच जाता है।

जब तेरा वह मासूम सा चेहरा याद आता है।

तेरे दिए इस नेकलेस में अब जंग लग गई है।

आंखें अब बूढ़ी हो गई है।

दिल तो जवां आज भी है।

पर जिस्म बूढ़ा हो गया है।

तेरे नेकलेस को अब झुर्री भरे गर्दन में ना पहन पाएगा।

तेरी पहचान से डरती हूं मैं।

तेरा नाम सुनते ही रो पड़ती हूं मैं।

यादों में कैद लिफाफा को।

करोड़ों बार पढ़ती हूं मैं।

खुद की तन्हाई से अकेले ही लड़ती हूं मैं।

खुद के जो जज़्बात है

उन्हें खुद को ही समझाया करती हूं। मैं

सब कुछ जान कर भी अंजान बनी रहती हूं। मैं

मैं कितनी भी दूर हूं

पर तेरी रूह में जिंदा रहती हू। मैं

यही सोच सोच कर घबराता है दिल।

कहीं लौट ना आए ओ मेरी जिंदगी में।

यही सोच सोच कर नजरें चुराती है ये बूढ़ी आंखें।

तेरे प्यार से कतराती है ए बूढ़ी आंखें।

तेरे जाने के बाद पुराने दिन याद कर शर्म आती है ये बूढ़ी आंखें।

तेरे प्यार की बोल सुनने के लिए तरस जाती है यह बूढ़ीआंखें।

बुढ़ापे की मायूसी को।

किसी वृद्धा आश्रम में बिताती है ये आंखें।

तजुर्बा है मुझे तेरे प्यार का।

तू मेरे लिए क्या कर सकता है।

तू आज भी मेरे लिए छत से कूद सकता है।

कभी कभी तेरे जुबा से तेरे दिलों की दास्तां सुनकर रो पड़ती है यह बूढ़ी आंखें।

तेरे दिलों की दास्तां सुनती हो मैं।

चाह कर भी कुछ ना कर पाती हूं।

तेरे प्यार में मैं मर भी ना पाती हूं।

वादा जो किया है तुमसे जीने का।

झूठा ही सही मैं तेरे लिए मुस्कुराती हूं। मैं।






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