प्रेम.....'s image
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जख्म ऐसे मिले कि सिले ही नहीं। 

तंज का दौर अब भी टले ही नहीं। 

किस ठौर भला ये मर्म कहें।

कहीं सिद्ध मनुज तो मिले ही नहीं। 

गुल मोहब्बत के अपने खिले ही नहीं..

अब किस्मत से सिकवे -गीले ही नहीं..

तुम झील मैं दरिया..मोहब्बत था जरिया..

जीवन के सागर में हम मिले ही नहीं....

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