Wada Shayari's image
Share0 Bookmarks 37 Reads0 Likes
क्यू वो मेरी बातो को समझती नहीं
क्यू दिल के जज़्बात को मेहसूस करती नहीं
मेरी खामोशी सुनने का दावा किया था
फिर क्यू वो मेरी मुस्कान को पहचानती नहीं

Wrriten By 
Shaikh Shezad 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts