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लड़की और दहेज....

Srivastav GauravSrivastav Gaurav March 11, 2022
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अपनी चाहत को कुर्बान कर दिया, 
समाज तुझपर एहसान कर दिया ॥
मेरे ससुराल की इज्ज़त की खातिर, 
मेरे बाप ने घर तक निलाम कर दिया ॥

  ऐ समाज तूने ये बेड़ियाँ क्यों पहनाई हैं, 
   जिसने जन्म दिया उसके लिए होना पराई हैं ॥
   खुद के सपनों को मार दूसरे का आंगन सजोना है, 
   इतना दहेज मांगा क्या किसी की बेटी खिलौना है ॥

समाज को अपने करतूत कर शर्मशार होना नहीं आता, 
कन्यादान देकर क्या किसी मां-बाप को रोना नहीं आता॥ 
तुम लड़के के खातिर जमीन आसमान एक कर सकते हो, 
क्या इस भेदभाव में किसी लड़की को रोना नहीं आता ॥

                  इन सब बातों पर न्याय कहाँ मिलता है, 
                  मुरझाया हुआ फूल फिर नहीं खिलता है ॥
                  लड़कियों की खातिर सोच अलग न रखो, 
                  यह जीवन है जो बड़ी मुश्किल से मिलता है ॥


-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_

              श्रीवास्तव_गौरव

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