भूली बिसरी यादें's image
Love PoetryPoetry1 min read

भूली बिसरी यादें

Srivastav GauravSrivastav Gaurav February 27, 2022
Share0 Bookmarks 33 Reads2 Likes

नजरें चुरा कर क्यों देख रही हो

नाम बदल कर क्यों खोज रही हो

नयी मुहब्बत से क्या दिल्लगी नहीं है

जो पुराने आशिक को सोच रही हो


तेरा मुझे छोड़ जाना आसान लग रहा था

मेरा प्यार तुमको एहसान लग रहा था

अकेले का जीवन भी श्मशान है 

मरने वाला भी नादान लग रहा था 


बिना देखे ही तुझको प्यार कर लिए

एक बार ना सही हजार बार कर लिए 

नये लोगों से मिलने की तेरी आदत नहीं गयी 

हम पुराने का सजदा हर बार कर लिये 


जीवन का सफर अब तन्हाई न देगा 

हजारों में अब तू सुनाई न देगा

पुराने का ज़िक्र नये लोगों से न करना 

क्या पता वो तुझे दिखाई न देगा

 

_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_


श्रीवास्तव गौरव 


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts