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वो फेमिनिज्म है न

Sristi MishraSristi Mishra December 7, 2022
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मैं सफर कर रही थी...

हाथ में किताब थी!

सुजाता चोखेरबली मैम की किताब "एक बटा दो”....

ऑफिस का काम आ गया, तो किताब किनारे रख दी... 

फोन में व्यस्त हो गई...

पड़ोस वाले भैया ने झट से मुझसे वो किताब मांग ली;  

जैसे वो प्रतीक्षा में हों...
मेरे किताब बंद करने की...

मैंने दे दी, वो पढ़ने लगे...

पढ़ते-पढ़ते उन्होंने काफी वक्त गुजारा, फिर मैं भी उनसे किताब वापस न मांग सकी...

मैंने फोन में ही खुद को व्यस्त रखा!

काफी देर पढ़ने के बाद...

उन्होंने किताब को बंद किया;

एक लंबी गहरी सांस ली... 

फिर मुझे किताब दी। 
मैंने ले ली...

फिर वो बेमन बोले- "मैंने 40 पेज पढ़ लिया, पढ़ तो लिया पर बोर हो गया।” 

मैंने कहा हो सकता है...सभी को साहित्य पसंद ही हो जरूरी नहीं।

"मैंने करीब 40 नोवेल पढ़ी हैं” उन्होंने कहा। 

मैंने कहा...हो सकता है आपको बोरिंग लगी हो।

फिर मेरे पूछने पर कारण बताया उन्होंने - थोड़ी अच्छी लगी...

फिर वो...
फेमिनिज्म आने लगा आगे...

तो...

मैं बोर हो गया।
.
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मुझे मालूम नहीं कि लोगों को फेमिनिज्म के बारे में पता भी है या नहीं, फिर भी कहूंगी की आखिर लोग औरतों की भावनाओं से बोर कैसे हो सकते हैं...?

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