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अब हमने छोड़ दिया.....!!!

souravthemahisouravthemahi May 24, 2022
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अक्सर हम जाया करते थे बगीचों में,
        अब हमने गुलाब को निहारना छोड़ दिया;

हमारा दिल अब भी तुझे सोचता हो,
         पर दिमाग ने तुझे अपना कहना छोड़ दिया;

हो ना हो मिलेंगे फिर हम तेरे बाजार में,
          पर हमने गैरों पर कीमत लगाना छोड़ दिया;

आज हुई फिर बारिश दिल के दिल्ली में,
            पर हमने इश्क में नहाना छोड़ दिया;

मुस्कुरा  रहा था जी भर के मैं,
      पर तेरे उदासी को देखकर मुस्कुराना छोड़ दिया;

गैरों की बाहों में लगा था कुछ अपनापन,
             पर गैरों को अपना बनाना छोड़ दिया;
    

                                  कुमार "सौरभ"
         

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