रतजगा's image
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था पता किसको की ऐसा हादसा हो जायेगा,
जिसको सब कहते थे पत्थर वो खुदा हो जाएगा!
मेरे हाथों की लकीरों में तुम्हारा नाम था,
यानी कि पहले से तय था राब्ता हो जाएगा!

कैद होना है मुझे भी इश्क़ की जंजीर में,
ओर फिर ये इश्क़ मेरा दायरा हो जाएगा!
डालकर आंखों में आंखे छोड़ कर जाना हमें,
इस बहाने ही चलो अहद-ऐ-वफ़ा हो जाएगा!

खत ख़यालों के तुम्हारे रोज पहुंचता है ये,
किसने सोचा था की दिल ये डाकिया हो जाएगा!
आज फिर इक बार आया है वो मेरे ख्वाब में,
आज फिर इक बार मेरा रतजगा हो जाएगा!

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