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हाथ पकड़ा जो मैंने

Somesh thakurSomesh thakur October 8, 2022
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हाथ पकड़ा जो मैने हिचक सी गई

जुल्फें आंखों पर आके लिपट सी गई


झुका के पलकें उसने देखा मुझे

मेरी बाहों में आकर सिमट सी गई


आकर बाहों में मेरी वो कहने लगी

अब दिल में तुम्हारे मैं रहने लगी


तुम ने देखा ऐसे मेरी तरफ

मेरे सब्र की इमारत अब ढहने लगी


तेरे इश्क़ का हुआ है ये कैसा असर

अब जिधर भी मैं देखूं तू आए नज़र


 तेरे बिन थे हम सदियों से बिखरे हुए

  तुझे पाकर हम भी गए है सवर

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