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मैं और मेरी तन्हाई

smartdharmendra231197smartdharmendra231197 November 16, 2022
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हम निकले हैं मुद्दतों बाद उनके ख़्वाब से,

जुगनू मिलके आ गया है जलते चराग़ से,

भीड़ में जाने को बेताब है मेरी तन्हाई,

फूल अब उक्ता गया है तन्हा किताब से।


-धर्मेन्द्र कश्यप 




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