शख्स यहाँ's image
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एहले-वफ़ा के खिससे सुना आता है हर शख्स यहाँ,
मयखाने में यही भूल कर आता है हर शख्स यहाँ।

कौन किसके साथ ता-उम्र रहता है यहाँ,
हर मोहब्त को सच्चा ही बताता है हर शख्स यहाँ।

ये ज़माने के लोग किसी न किसी के हिससे में जीना चाहते हैं यहाँ,
चेहरो पे चेहरा बदलता दिखता हैं हर शख्स यहाँ।

उसकी बातों पे गुज़रा करना पड़ता है अब यहाँ,
उसी की ज़बां वाला लगता हैं हर शख्स यहाँ।

तुझे आगे बढ़ता देखा कोई खुश नही होता यहाँ,
"गुलशन" तेरी कामयाबी से जलता है हर शख्स यहाँ।

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