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खतरे की घंटी

suresh kumar guptasuresh kumar gupta May 23, 2023
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विकास की सीढ़ियां चढ़ते जा रहे।
प्रकृति का दोहन अपव्यय कर रहे।
धरती पर एक ही जीवनदाता जल।
खेलते रहे जल से क्या होगा कल।

नहर खेत पर नहाते बीता बचपन।
हरियाली बारिश खुशहाल जीवन।
पूल टब में बर्बाद करते जाते जल।
खेलते रहे जल से क्या होगा कल।

गर्मी बढ़ती जल की हुई क़िल्लत।
जल समाधान एक करते संरक्षण।
मुहाने पर आ खड़े है जल-संकट।
खेलते रहे जल से क्या होगा कल।

गिरता जलस्तर हुआ प्रदूषित जल।
फैल रही बीमारियां दूषित पेयजल।
लुप्त होने के कगार पर प्रजातियां।
खेलते रहे जल से क्या होगा कल।

सरकार मानव मात्र की चुनौती है।
सूख रही है धरती पीते गन्दा जल।
मानवता के लिए है खतरे की घंटी।
जल से खेलते रहे क्या होगा कल।

#सुरेश_गुप्ता
स्वरचित

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