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कांच की दीवार

suresh kumar guptasuresh kumar gupta March 5, 2023
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जीवन निकल गया रेत की तरह
आपस मे एक दूजे को समझाते

न वे कुछ समझा सके मुझको
न ही मैं उन्हें कुछ समझा पाया

बीच मे बनी थी कांच की दीवार 
वे उस पार बैठे हम इस पार थे

जीवन का दर

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