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भूल जाते है

Siddhant SonawaneSiddhant Sonawane June 16, 2020
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दूर दृष्टि, चाँद को दीखना तो नहीं,

और न तो सूरज को खोजना । 

अंकुर निकलते हैं पृथ्वी के दबाव में , 

मगर नज़रो के दबे तले कैसे बीज बोने।। 


अब देख सकता हूँ ,

तो सब आँखों में , मेरे कल कि एक मुख्य निराशा ,

अब सुन सकता हूँ,

 तो बस मेरे कल कि वो खड़खड़ाती सिसकी , 

लोग मुझे भूलना चाहते हैं , मेरे कल को नहीं ।।

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