सुकून और खारा पानी's image
Love PoetryPoetry1 min read

सुकून और खारा पानी

Shwetang SharmaShwetang Sharma January 21, 2023
Share0 Bookmarks 31 Reads0 Likes

उसने इठलाकर मेरा हाथ पकड़ा,

और बोली......

दो पल सुकून से बैठो मेरे पास|

और टकटकी लगाई मेरे चहरे को देखती रही||


अनगिनत सवालों के गहरे समंदर,

उसकी आँखों में उमड़ रहे थे|

कुछ लहरें,

जो उसकी पलकों पर ठहरी थी,

सरक कर गालों पर आ गिरी|


अपने होठों के साहिलों पर

मैंने

उन नम लहरों को सोख लिया|

बस इतना हुआ

क़ि

उसे "सुकून" मिला और मुझे "खारा पानी"||

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts