मकान सबका उँचा हैं, पर सस्ता हैं ||'s image
Kumar VishwasPoetry1 min read

मकान सबका उँचा हैं, पर सस्ता हैं ||

Shwetang SharmaShwetang Sharma November 27, 2021
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इस शहर का खूब चर्चा हैं ||

मकान सबका उँचा हैं, पर सस्ता हैं ||


झूठी हैं सबके चेहरे पर रखी हँसी,

अंदर से सबका हाल ख़स्ता है ||


किसी को तो रहने दे आज़ाद ए खुदा,

क्यों तू सबका नसीब लिखता हैं ||


हैरान हैं ना तू भी मेरे सवालों से,

तेरे खुदा होने पर मुझे कभी कभी शक़ होता हैं ||


चाहते सब यही हैं कि मैं चुप हो जाउ,

पर मज़बूरी हैं कि सुनना पड़ रहा हैं ||

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