मुश्किल's image
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बहते आंसुओ को आंखों में दबाना मैंने बड़ी मुश्किल से सीखा है,
भीड़ में होकर भी तन्हा हो जाने का गम मैंने कुछ देर से समझा है,

करीब होकर जो लोग मेरे अपने नहीं थे उन लोगों को जरा मैंने विलंबन से पहचाना है,

तैरना नहीं आता है मुझे मगर लहरों के उफान से भिड़ जाना बड़ी कठिनता से सीखा है मैंने,

मुझे लिखना नहीं आता है मगर शब्दों को अपना हथियार बनाना बड़ी जटिलता से सीखा है मैंने,

बोल कर जबान लड़खड़ा जाया करती थी बड़ी मुसीबत से आत्मविश्वास को गले लगाया है मैंने,

लिखने को तो लिख दूं जिन्दगी मगर इस जिन्दगी को बड़ी ही मुश्किल से जीना सीखा है मैंने..!

श्वेता मिश्रा (आजाद पंक्ति)

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