तेरी जुबां कहे शाम's image
Poetry1 min read

तेरी जुबां कहे शाम

Shrutika SahShrutika Sah December 26, 2022
Share0 Bookmarks 50 Reads2 Likes
ये सफ़र के शजर आज ठहरे ज़रा
और तू कहे तो शाम हो जाए,
आज चांद भी रोक लूं मैं इन शामों तले,
करूं सजदा कि हर दरख़्त तेरा ग़ुलाम हो जाए,
मलाल ना अंधेरों का है ना स्याह का और ना रंगों का,
ये सांवला सा आसमां तेरी जुबां कहे और नूर-ए-गुलफ़ाम हो जाए!!

~श्रुतिका साह

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts