मेरी विधाता's image
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मेरी माँ मुझे जग से प्यारी।

माँ ने ही तो मेरी जिंदगी सँवारी।।



माँ ने इस लाडले बेटे को ,

मुंह का निवाला निकाल कर दिया।

जिंदगी का हर सुख कुर्बान किया।।


मैं जब भी देर- सवेर होता हूं,

माँ की तड़प, सीमा लांघ जाती है।

और जब घर जाता हूं,

माँ की आंखें चमक जाती है।

जब-जब भी उनको देखता हूं,

हर इक पल मेरी फिक्र में मिलती है।



जब भी घर से बाहर,

सोने-खाने- नहाने का जिक्र होता है।

मुझे माँ की याद सता जाती है,

यही तो वजह उनकी मीठी झिड़कियों की होती है।


माँ की आंखें पढ़ने में माहिर है,

उन्हें मेरे दुःख-दर्द की समझ है।

तभी तो मेरी छोटी सी पीड़ा से ही,

उनकी अविचल अश्रुधारा बह जाती है।


भले ही हूं, मैं नौकरीपेशा।

मेरी माँ का एक ही सवाल

क्या है, तेरे पास पैसा??


मैंने जो पाया, मेरी माँ की मेहनत है।

और जो खोया मैंने, वो तो केवल

माँ की सीख न मानने का नतीजा है।।


माँ की नसीहतें साथ लिए चलता हूं,

वही तो आगे की राह दिखाती है।

दुर्गम पथ पर भी, सुगम राह बनाती है।।


मेरी विधाता, मेरा मान-सम्मान

और मेरा अभिमान है माँ

ईश्वर की अद्भुत रचना है माँ।।


#shrii_writes

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