समाजवाद मुखर हो, ऐसी गर्जना करो ~©संजय कवि 'श्रीश्री''s image
Poetry1 min read

समाजवाद मुखर हो, ऐसी गर्जना करो ~©संजय कवि 'श्रीश्री'

Shree ShreeShree Shree May 4, 2022
Share0 Bookmarks 94 Reads0 Likes

सत्ता बनी धृतराष्ट्र है

अनीति आज नीति है

प्रतिशोध द्वेष क्रोध की

जाने ये कैसी रीति है।

माँ बहन की आबरू

रक्षक बने वो लुटते

घिघिया रहा गरीब है

दानव बने वो कूटते।

पाप शिखर है चढ़ा 

माँ भारती है कांपती

अधर में नौनिहाल हैं

भविष्य को है भांपती।

हे राष्ट्रपुत्र! सुन सको

तो सुन लो, माँ पुकारती

विकल्प शेष अब नहीं

है आत्मा ललकारती।

जगो जगो उठो उठो

प्रचंड समर शेष है

हुंकार के दहाड़ दो

ये युद्ध अब विशेष है।

समाजवाद मुखर हो

अनीति वर्जना करो

डोल जाये तख्त, अब

ऐसी गर्जना करो।

~©संजय कवि 'श्रीश्री'

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts