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जय पर अनंत विश्वास रहे ~संजय कवि 'श्रीश्री'

Shree ShreeShree Shree July 2, 2022
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इतिहास प्रमाणित करता है,

समर यहां कब सरल रहा;

उगल चुके हैं सब अपना,

जिसमें जितना गरल रहा।

जो होता है सब अच्छा है,

शत्रु मित्र पहचान लिए;

ये राजनीति का चक्रव्यूह,

सारे पथ तुमने जान लिए।

हियँ धरि बजरंगी, हे अनन्य!

जय पर अनंत विश्वास रहे;

बूंद बूंद से बना है सागर,

अटल सदा ये आस रहे।

~©संजय कवि 'श्रीश्री'

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