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Why do I writePoetry2 min read

लिख दिया करता हूं यूं हीं...!

शिव अकेलाशिव अकेला January 18, 2022
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ना शायर हूं ना कवी
ना मैं प्रेमी ना ज्ञानी 
दिल की कथा-कहानी
बस लिख दिया करता हूं यूं हीं

कुछ पढ़ कर डूब जाता हूं
ख़याल मैं खूब सजाता हूं 
जो समझ ना आता वो लिख जाता
कभी कलम पकड़ बैठा रह जाता
अपने भाव छुपाने में
सफल नहीं हो पाता हूं
कवी नहीं ना शायर हूं 
बस लिख दिया करता हूं यूं हीं

पूजा-नमाज़ है अच्छी बात 
पर वो मैं कब कर पाता हूं
अपनी श्रद्धा अपना सच
मैं लिखने में ही पाता हूं
और नहीं कुछ समझ में आता 
सो यही हर रोज दोहराता
अपने भाव व्यक्त करने को
बस लिख दिया करता हूं यूं हीं
कवी नहीं ना शायर हूं 
बस लिख दिया करता हूं यूं हीं

वो उन्दा शायर जो केह गए
सरल‌ सी बात जादूगरी से
वो कवी जिन्होंने ढूंढ ली
अपनी उपमाएं गली गली से
उनसे कुछ-कुछ सीखकर
बस लिख दिया करता हूं यूं हीं
कवी नहीं ना शायर हूं 
बस लिख दिया करता हूं यूं हीं

मन गेहरा बहुत है मेरा
भरता नहीं चंद अशआरों से
सो भरके अपने ख़यालों से
कुछ बातें केह देता हूं यूं हीं
कवी नहीं ना शायर हूं 
बस लिख दिया करता हूं यूं हीं 

-शिव अकेला

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