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हम ब-दस्तूर गुनगुनाते रहे...

शिव अकेलाशिव अकेला January 23, 2022
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हम ब-दस्तूर गुनगुनाते रहे
आँखें खोल ख़्वाब सजाते रहे

वो अपने तौर-तरीके सिखाने आए
हम अपना ही गीत गाते रहे

ज़िन्दगी भर जो कुछ भी सीखा
सब कुछ तबीअ'त से दोहराते रहे

जब थक गए वो हमें समझाकर 
हम भी कुछ-कुछ सिखाते रहे

'अकेला' था जब, कई लोग थे रोकने वाले
मंज़िल की चाह में हम, ख़ुद से आगे जाते रहे।

-शिव अकेला

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