भारत : देश मेरे सपनों का !'s image
IndiaPoetry3 min read

भारत : देश मेरे सपनों का !

शिव अकेलाशिव अकेला February 1, 2022
Share0 Bookmarks 31 Reads1 Likes
पूरब के सुंदरबन या की 
पश्चिम का गेट समंदर वाला
उत्तर का हिम-आँचल देखो
दृश्य मोहित करने वाला

दक्षिण तटों का भंडार
मध्य में हरियाली-बहार
असंख्य नदियों की बहे धार
मिट्टी से उगे कई कारोबार

कल कल कल कल बहती नदियां
झर झर झर झर गिरते झरने
टिप टिप टप टप बरसता सावन
ठिठुरती मीठी जाड़ों की किरणें

दक्षिण में लगी साँपों की घात
पश्चिम गिनता शेरों के दाँत
मध्य बाघ और बारहसिंगा
बंगाल टाइगर, वाह क्या बात
उत्तर में शातिर लोमड़ी
भालू संग गीदड़ की प्रभात

कितने हाथी हिरण जिराफ़
कितने ही यहां पशू मिलते हैं
मोर पपीहे तोता कोयल
तितली संग फूल कई खिलते हैं

अलग-अलग सी भाषा है
अलग यहां सबका व्यवहार
अलग कई संस्कृतियाँ हैं पर
विविधता में भी है प्यार

संस्कारों कि भूमी है ये
योग-आयुर्वेद उपज यहां की
शस्त्र-शास्त्र की पूंजी है 
प्रेम-मिलन की गूंजें भी

नृत्य-गायन, लेखन आदि,
सभी कलाओं को साधा है
मृदंग वीणा तबले ड़ोल 
शंख बांसुरी संग गिटार भी

पौराणिक शुद्धता है 
जीवन का आधार है
रिश्तों कि अनमोल पूंजी है
श्रद्धा और संस्कार भी

ये भारत है एक धरोहर
उस सृष्टि रचैता की
जहां हवाओं में शुद्धता है
और शुद्ध व्यवहार भी

बात अभी तक हुई नहीं
पहाड़ों, सागर और उन छोटी-छोटी गलियों की

साधारण से लोगों में भी
छोटी-छोटी गलियों के
अनोखी है कई बात 
समझ आए ना शायद सदियों में

ये भारत का आंशिक दर्शन है
अभी तो कई कहानियां हैं
इसके कण-कण में हैं ईश्वर
छिपी कई कुर्बानियां हैं

ये भारत है 
मेरा भारत है
कई संप्रदाय रिवाज़ यहां
चोट अगर लग जाए कभी तो
स्नेह-मदत के हाथ यहां

ये भारत है 
जो सीने में एक जोश नया भर देता है
जीना-मरना इस मिट्टी में हो तो
दोनों ही सफल कर देता है

ये भारत है; मेरा भारत है
जहां शौर्य गर्व भी फूलता है
दुश्मनी अगर इससे हो तो 
दूश्मन जीना भूलता है

ये भारत है
मेरा भारत है
जहां प्रेम की छाया रहती है
ये भारत वही भारत है
जहां रगों में वीरता बहती है 

इस कविता का सार यही
है देश महान यही।
जह हिंद! 

-शिव अकेला

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts