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हिंदी कविताPoetry1 min read

जब से तुम; दिखते नहीं हो

Shivam MishraShivam Mishra November 20, 2022
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मन व्यथित सा हो गया है,

जब से तुम; दिखते नहीं हो।


सूख गये हैं, ताल-तलैया..और

उपवन की हरियाली,

पवनें भी अब मचल उठी हैं,

जब से तुम; दिखते नहीं हो।


सूनी हैं आंखें तुम बिन,

सूनी है; जीवन की फुलवारी,

आंखें भी अब थक चुकी हैं,

जब से तुम; दिखते नहीं हो।


छोंड़ गयीं अब सारी खुशियां,

छोंड़ गयी है उजियारी,

अब नींद भी आती नहीं है,

जब से तुम; दिखते नहीं हो।


कोयल भी अब भूल गयीं हैं

अपनी वो मीठी वांणी,..और 

चांद भी रूठा है मुझसे,

जब से तुम; दिखते नहीं हो।


मन व्यथित सा हो गया है,

जब से तुम; दिखते नहीं हो।


    :- शिवम् मिश्रा



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