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तेरा आख़िरी संदेश पढ़-कर...

Shivam VermaShivam Verma January 18, 2022
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तेरा आख़िरी संदेश पढ़-कर,
फिर टूटते हैं, मेरे कुछ अफ़साने तड़प-तड़प कर,
थे कुछ ख़्याल, जिनके साथ जीने की थी, आस मुझे।
जाने क्यों याद आते हो तुम इतना रह-रह कर,
मन सिहर जाता है तुझसे दूर होने को सोच कर।
यूँ बैठने लगता है, दिल मेरा, 
तेरा आख़िरी संदेश पढ़-कर।
क्या, ताल्लुकों से बढ़कर गुस्ताखियाँ हुआ करती हैं,
न इल्म था मुझे, कि ऐसी भी, गुस्ताखियाँ हुआ करती हैं।
तुम आओ, या न आओ लौटकर, मेरे ताल्लुक़ में
ये दिल तुमको, हमेशा याद करेगा,
तेरा आख़िरी संदेश पढ़-कर।

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