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हिज्र की शाम

Shiv Pratap PreetamShiv Pratap Preetam June 16, 2020
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हिज्र की शाम को हम ऐसे रोये,

इश्क़ था शर्मिंदा सपने खोए - खोए

वफाओं को भी अपने होने पर नाराजगी थी,

खुदा ने भी गंगा में अपने पाप धोए।

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