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पिता और २९ वर्ष

Shipra shritiShipra shriti March 4, 2022
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29, अंक नहीं मेरे जीवन का एक अध्याय है और सेवानिवृति मेरे जीवन के दूसरे अध्याय के लिए एक परिपक्व निष्कर्ष है।

मैं ढाल बना, प्रबल बना
भूचाल में भी अदम्य बना
झुका नहीं मैं आधिपत्य से
किंतु मैं उत्थित हुआ।
अखंड भी मैं, विनम्र भी मैं
भावी पीढ़ी का उदाहरण भी मैं
परों को बुलंद किया
आशाओं को सामर्थ्य दिया
करुण, तारुण्य, अरुण
अभिरूण से परिपूर्ण
आधुनिक नहीं मैं पर आधुनिकता को अपनाता हूं
जीवन एक पहेली है
मैं चकित नहीं पर सुलझाता हूं।

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