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रोटी को मोहताज

Shikha singhShikha singh November 20, 2021
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शर्म की बात है

जिस माँ-बाप ने एक-एक पाई जोड़कर अपने बच्चे को पाला

अपने सपनो को ताक पे रखकर उनके सपने पूरे किये

खुद कम रोटी खाकर उसे भरपेट खिलाया

खुद कपड़े फटे पहने उसे नये कपड़े दिलाये

वो ही बच्चे आज नौकरी मिलने पर अपने माँ-बाप से दूर है

माँ-बाप की खैर खबर तक भी पूछने का उनके पास वक्त नहीं है

माँ-बाप गांव मे भूखे है या उन्होंने खाना भी खाया या नही

उन्हे उनसे कोई वास्ता ही नही है,

वो बस अपनी जिंदगी खुशी से बिताते में व्यस्त है

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