लेडीज परफ्यूम's image
Poetry13 min read

लेडीज परफ्यूम

Shikha singhShikha singh August 10, 2022
Share0 Bookmarks 52 Reads0 Likes

शादी का माहौल है ।

चारो ओर गाने बजाने शोर शराबा हो रहा है ।

कहीं कोई किसी की चुटकी ले रहा है तो कोई किसी को छेड़ रहा है तो कहीं बच्चे दौड़भाग रहे है ।

हर किसी के चेहरे से खुशी झलक रही है ।

इनमे एक चेहरा है जो आज कुछ ज्यादा ही खुश दिख रहा है ।

दुल्हन बनी पिंकी के पास जो खड़ी है हां हां वही पिंकी की माँ आसिमा मेरे यार की बीवी ।

देखो तो कितनी खुश है अपनी बेटी को मेंहदी लगते

देखकर ।

आज कितने वर्षो के बाद ये चेहरा इतना खिला है ।

सूरज के जाने के बाद तो ये चेहरा मुरझा ही गया था ।

कितनी खामोश रहने लगी थी आसिमा ।


6बरस गुजर गए यार तेरे गए

पर तु अब भी हमारे दिलो मे जिंदा है ।

यार तू भी ऊपर से अपनी लाडली की शादी देखकर बहुत खुश होगा आज ।

तेरा तो यही सपना था ना ।

अपनी बेटी को तू भी आशीर्वाद दे रहा होगा ।

देख आज कितने वर्षों बाद तेरे घर रौनक सजी है ।


यार तू सिर्फ एक अच्छा दोस्त ही नही था

तू एक अच्छा प्रेमी

अच्छा पति

और एक अच्छा पिता भी था ।


अरे अभी तक मैने खुद का परिचय तो करवाया ही नही

मै अनुज शर्मा हूँ

सूरज सक्सेना का दोस्त ।


मैं आपको सूरज और आसिमा की प्रेम कहानी बताता हूँ मैं आपको लेकर चलता हूँ यादों के गलियारे में ।


मैं और सूरज बचपन के दोस्त थे कॉलेज मे भी हम साथ ही थे । मेरी गर्लफ्रेंड थी रिया । मैं उसे बहुत चाहता था । लेकिन मैं उसका जन्मदिन भूल जाता था हर साल और इस साल भी यही हुआ मैं रिया का जन्मदिन फिर भूल गया । इस बात को लेकर हम दोनो मे बहस हो गई । रिया नाराज होकर घर चली गई । मैं भी कैंटीन में मुँह लटकाए बैठा था । सूरज आया और उसने मुझे ऐसे बैठा देखा तो उसने मुझसे पूछा - यार क्या बात है तू मुँह लटका कर यहाँ क्यों बैठा है आज तो रिया का बर्थडे है ना मैं भी कब से उसे ही ढूंढ रहा था पर वो मुझे कहीं दिखी नही । मैंने जब कुछ नही कहा तो सूरज ने कहा - यार क्या हो गया कुछ तो बोल, कहीं तू रिया का बर्थडे तो नही भूल गया । मैंने हां मे बस अपना सर हिलाया । सूरज मेरे बगल मे आकर बैठ गया । अरे इसमे कौन सी बड़ी बात है । तू अब जाकर विस कर दे । मैंने कहा - मगर वो तो नाराज होकर चली गई ।

अरे तो क्या हो गया सूरज बोला । आज उसका दिन है , उसका हक बनता है नाराज होने का। मैंने कहा - यार तू भी रिया की साइड ले रहा है । तू मेरा दोस्त है या रिया का । सूरज ने कहा - दोनो का । अच्छा छोड़ ये सब । तूने रिया के लिए कोई गिफ्ट-शिफ्ट लिया । मैंने कहा - नही अभी नही लिया । तू तो जानता ही है यार मां कितनी मेहनत करके मुझे पैसे भेजती है । इस महीने उन्होंने थोड़े कम पैसे भेजे थे । मेरे पास भी कम ही पैसे बचे है और उन पैसो मे कोई अच्छा गिफ्ट भी नही मिलेगा । सूरज ने कहा - यार तू कितना सोचता है मैं हूँ ना, तू मुझसे पैसे ले ले । मैंने मना किया तो सूरज कहने लगा तू मुझे अपना दोस्त नही मानता इसलिये मना कर रहा है ना, मैं क्या करता मान गया । मैंने सूरज से कहा - यार तू ही कुछ अच्छा सा गिफ्ट ले आ । रिया तो घर चली गई । अब मैं ही क्लास कर लेता हूँ । तब तक तू भी आ जायेगा फिर साथ ही चलेंगे दोनो उसके घर । मैं क्लास के लिए चला गया और सूरज गिफ्ट खरीदने ।


सूरज ने सोचा उसे भी तो रिया को कोई गिफ्ट देना चाहिए । वो कॉस्मेटिक शाॅप पे गया ।

दुकानदार ने पूछा - भाई क्या चाहिए आपको?

सूरज ने कहा - कोई अच्छी सी लेडीज परफ्यूम देना ।

दुकानदार ने पूछा - कौन सी चाहिए?

सूरज ने कहा - कोई भी दे दो जो अच्छी हो ।

दुकानदार ने सूरज से पूछा - भाई क्या आप लड़कियो वाले परफ्यूम लगाते हो ?

सूरज हल्का सा मुस्कुराया - अरे नही भाई ये हम किसी और के लिए ले रहे है ।

दुकानदार बोला - अच्छा तो अपनी गर्लफ्रेंड के लिए ले रहे है ।

सूरज बोला - अरे नही भाई मेरी दोस्त के लिए ।

तभी दुकान का मालिक वहां आ गया । उसने उस दुकानदार को घूरा और कहा - तुम्हे यहां सामान बेचने को रखा है या ग्राहको से बात करने को । जाओ यहां से । वो आदमी वहां से चला गया ।

बोलो भाई क्या चाहिए आपको - मालिक ने पूछा ।

जी लेडीज परफ्यूम सूरज बोला ।

उसने परफ्यूम खरीदा और बाहर आ गया । वो सोचने लगा अजीब इंसान है क्या हो गया अगर उसने मुझसे बात कर ली तो बेकार मे ही बेचारे को डांट दिया । सूरज अब एक शोरूम की ओर बढ़ गया ।


ये वही शोरूम है जहां सूरज और आसिमा पहली बार मिले थे ।


सूरज शोरूम के अंदर गया । उसने एक बहुत अच्छी ड्रेस पसंद की और काउंटर पे बिल बनवाने गया । उसने देखा एक खूबसूरत सी लड़की बिल काउंटर पे खड़ी है वो उसे देखता ही रह गया । कब उसका नम्बर आ गया उसे पता ही नही चला । वो लड़की उसके आंखो के सामने हाथ हिला रही थी तब जाके उसे होश आया । उसने सूरज से पूछा - सर आप ठीक तो है?

उसने हड़बड़ाते हुए जवाब दिया - जी मैं ठीक हूँ ।

उसने वो ड्रेस उसकी ओर बढ़ाया । जी बिल बना दीजिए । उसने बिल चुकाया और जाने लगा ।

आसिमा ने कहा - सर आपकी पसंद बहुत अच्छी है । शुक्रिया आप अक्सर यहां आते रहिये ।

सूरज ने कहा - हां मेरी पसंद अच्छी है । वो मुस्कुराया और चला गया ।


जाते वक्त परफ्यूम सूरज के जेब से गिर जाता है । आसिमा परफ्यूम गिरते हुए देखती है । वो काउंटर से बाहर आती है । सूरज आगे बढ़ जाता है । आसिमा परफ्यूम लेकर उसके पीछे जाती है । वो सूरज को आवाज लगाती है लेकिन सूरज को आवाज नही आती । एक आदमी सूरज से कहता है - भाई कोई आपको रूकने के लिए कह रहा है । वो पीछे पलटकर देखता है । अरे ये तो वही है । आसिमा का ध्यान परफ्यूम पे जाता है । ये तो लेडीज परफ्यूम है । वो सोचती है कमाल का लड़का है लेडीज परफ्यूम इस्तेमाल करता है । वो सूरज को परफ्यूम देती है और कहती है - लीजिए आपका परफ्यूम वही गिर गया था ।

सूरज कहता है - शुक्रिया आपने इसे लौटा दिया नही तो मै इसे ढूंढता ही रह जाता । ठीक है अब मैं जाता हूँ । इस बार जाते-जाते वो जान-बूझकर अपना कॉलेज कार्ड वहीं गिरा देता है और वहां से चला जाता है । वो सोचता है कल आकर ले लूंगा, इसी बहाने कल फिर से उससे मुलाकात हो जाएगी । आसिमा भी दुकान मे चली जाती है । इस बार वो कार्ड को नही देखती है । गार्ड उसे आकर कार्ड देता है ।

गार्ड कहता है आसिमा से - लगता है किसी ग्राहक का कार्ड गलती से यहीं गिर गया है बेचारा इसे ढूंढ रहा होगा रख लीजिए इसे संभालकर वो यहां ढूंढता हुआ आएगा तो दे दीजिएगा ।

आसिमा गार्ड से कार्ड ले लेती है और अपने बैग में संभालकर रख देती है । रात में जब वो अपने बैग से मोबाइल निकालती है तब उसकी नजर कार्ड पर जाती है वो कार्ड बाहर निकालती है और कहती है पता नही कैसे कैसे लोग होते है, एक वो था लेडीज परफ्यूम वाला जिसने अपना परफ्यूम गिराया था । अब ये कौन है जिसका कार्ड ही खो गया है । जैसे ही उसने कार्ड को देखा तो उसमे सूरज का फोटो देखकर वो बोली अरे ये तो वही लेडीज परफ्यूम वाला लड़का है देखो तो इसने पहले परफ्यूम गिरा दिया था और अब कार्ड ।


अगले दिन सूरज कार्ड लेने के लिए शोरूम जाता है । वहाँ आसिमा उसे कहीं नजर नही आती काउंटर पे भी कोई और था वो सोचने लगा वो लड़की आज कहीं दिख क्यों नही रही है!

गार्ड जब सूरज को देखता है तो वो उसके पास जाता है और कहता है सर आप यहां अपना कार्ड ढूंढने आए है?

सूरज ने गार्ड को देखा और पूछा - आपको कैसे पता ।

गार्ड ने कहा - कल आपका कार्ड यहीं गिर गया था वो मैंने ही उठाया था, उसपे आपकी तस्वीर थी मैंने देखा था इसलिए मैं आपको पहचान गया ।

सूरज ने पूछा - तो क्या वो कार्ड आपके पास है?

गार्ड ने कहा - नहीं वो कार्ड तो मैंने आसिमा को दिया था ।

सूरज ने पूछा - तो कहाँ है वो ।

गार्ड ने जवाब दिया - वो तो दोपहर को आयेगी ।

सूरज ने पूछा - वो तो यहां काम करती है न तो दोपहर में क्यों आयेगी?

गार्ड ने कहा - सर वो तो यहां के मालिक की बेटी है, काम सिखना चाहती है इसलिए कॉलेज खत्म होने के बाद यहां आ जाती है ।

सूरज ने कहा - अच्छा तो वो यहां के मालिक की बेटी है, ठीक है तो मैं दोपहर में आता हूँ कार्ड लेने ।


दोपहर में सूरज शोरूम जाता है तो वहां आसिमा आ गयी रहती है । वो उसके पास जाता है ।

आसिमा उसे देखकर कहती है - ओह तो तुम आ गए, ये लो अपना कार्ड और संभाल कर रखना और हां सुनो अब कुछ मत गिरा देना अब से मैं वापस नहीं करूंगी । आसिमा मुस्कुराने लगी ।

सूरज जाने को हुआ तो आसिमा ने सूरज से कहा - जरूरी नही है कि हर बार खोया हुआ सामान वापस मिल ही जाये ।

सूरज ने जवाब दिया - हां वो तो है ।

इस बार उसने कुछ भी गिराना सही नही समझा । वो सोचने लगा अगर बार-बार मैं ऐसा करूंगा तो वो मुझे लापरवाह समझने लगेगी । वो कार्ड लेकर लौट गया ।


अब वो अक्सर शोरूम के आसपास ही भटकता रहता । कॉलेज में तो उसका दिल ही नहीं लगता था । वो आसिमा को देखने के लिए हरदम कुछ न कुछ करता रहता । उसने बहुत सारे हथकंडे अपनाए । वो शोरूम में जानेवाले अपने हमउम्र लड़को के साथ उसका दोस्त बनकर चला जाता । जब आसिमा ने कुछ दिन तक ऐसा होते देखा तो वो सोचने लगी इसके कितने सारे दोस्त है जो ये रोज नए नए दोस्तो के साथ यहां आ जाता है?


एक दिन हद तो तब हो गई जब वो एक हम उम्र लड़के को अपने साथ जाने को मनाया तो उसने उससे रूपये मांगे ।

उसने सोचा कब तक ऐसे चलेगा । कुछ ठोस कदम उठाना होगा ।

सूरज एक दिन शोरूम पहुंचा और वहाँ के मालिक से मिन्नते करने लगा कि उसे काम पर रख ले । मालिक ने मना किया तो वो कहने लगा मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ सर मगर आप मुझे कोई भी काम दे दे जरूर । सर मुझे पैसे की बहुत जरूरत है । उसने इतनी मिन्नत की कि मालिक मान गया । उसने सूरज से कहा - यहां अभी कोई जगह खाली नही है । हां सफाईवाले की जरूरत है क्या तुम ये काम करोगे?

वैसे देखने मे तुम पढ़े-लिखे लड़के लगते हो? अगर तुम यहां काम करते हो तो मैं तुम्हे इसके अच्छे पैसे दूंगा और भी कोई नौकरी दिखा तो तुम्हे बता दूंगा ।

तो बताओ तुम्हारा क्या फैसला है?

सूरज बोला - सर मुझे मंजूर है ।

अब वो शोरूम में सफाईवाला बनकर काम करने जाता और घंटो आसिमा के आस-पास ही रहता ।

एक दिन जब एक ग्राहक ने चाय गिरा दिया तो आसिमा सफाईवाले को बुलाने गयी , वहां वो सूरज को देखकर हैरान हो गई ।

उसने सूरज से पूछा - तुम यहाँ क्या कर रहे हो?

सूरज बोला - मैं यहाँ काम करता हूँ ।

आसिमा ने पूछा - कबसे ।

सूरज बोला - एक महीने से ।

आसिमा ने पूछा - पर तुम यहाँ काम क्यों कर रहे हो , तुम तो कॉलेज मे पढ़ाई करते हो कहीं भी किसी भी अच्छी जगह पे तुम्हे काम मिल जाएगा फिर ये सफाईवाला काम क्यों?

सूरज बोला - मैडम कोई काम छोटा या बड़ा नही होता काम तो काम होता है ।

आसिमा ने कहा - ये डायलॉग मारना छोड़ो और बताओ क्या बात है? तुम क्यों यहाँ काम कर रहे हो?

सूरज ने पूछा - क्या तुम्हे सच जानना है?

आसिमा ने कहा - हां

सूरज बोला - जब मैं पहली बार यहाँ आया था तो तुम मुझे पसंद आयी थी फिर जब जब मैं यहाँ आया तुम पसंद से चाहत बन गयी और बस अपनी चाहत की खातिर मैं यहाँ काम करने लगा ।

आसिमा ने उस वक्त कुछ नही कहा वो वहाँ से चली गयी ।

कुछ दिन बीते, महीना होने को आया ।

सूरज आसिमा को यूं खामोश देखकर उकता गया । वो सोच रहा था कि आसिमा उससे कुछ कहती क्यों नही? क्या उसे आसिमा से फिर से पूछना चाहिए? उसने हिम्मत की और एक दिन आसिमा से पूछ ही लिया ।

इसबार आसिमा का जवाब आया । जवाब हाँ में था । कुछ सालो बाद दोनो परिवारवालो को मना कर उन्होंने शादी कर ली ।

ये थी मेरे यार सूरज और आसिमा की प्रेम कहानी


देख यार सूरज तेरी बेटी आज कितनी बड़ी हो गई है, दुल्हन बनी है, रात को उसकी बारात आयेगी , मैं तो जी भरके नाचूंगा पिंकी की शादी में और तू अपनी पिंकी को आशीर्वाद जरूर देना ।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts